पहली बार रक्तदान कर अमृत सोनवानी ने जिंदगी बचाने में किया सहयोग, दिया संदेश— "रक्तदान करें, किसी की सांसों को नया जीवन दें"
बिलासपुर । रक्तदान को महादान कहा जाता है और इसे सार्थक करते हुए नरगोड़ा निवासी अमृत सोनवानी (33 वर्ष) पिता ऋषि कुमार ने मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने सिम्स अस्पताल में भर्ती सेमरताल निवासी खिलन बाई गढ़ेवाल (65 वर्ष), पति बंशीलाल गढ़ेवाल के लिए बी पॉजिटिव (B+) रक्त की एक यूनिट दान की। रक्त उपलब्ध होने से उनका ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। पहली बार रक्तदान करने वाले अमृत सोनवानी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें थोड़ी घबराहट जरूर थी, लेकिन रक्तदान के बाद उनका डर पूरी तरह दूर हो गया। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से न तो कोई कमजोरी आती है और न ही स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, यह संतोष मिलता है कि किसी जरूरतमंद की जान बचाने में अपना योगदान दिया। अमृत ने समाज से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार स्वेच्छा से रक्तदान अवश्य करना चाहिए। समय पर किया गया एक यूनिट रक्त किसी परिवार की खुशियां लौटाने और किसी की जिंदगी बचाने का माध्यम बन सकता है। यह प्रेरणादायक पहल समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश देती है कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है और जरूरत पड़ने पर केवल एक जागरूक रक्तदाता ही किसी मरीज के लिए जीवनदाता बन सकता है।
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