राष्ट्रीय शिल्प गुरु गोविन्द झारा को राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल

रायगढ़। बेलमेटल कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले शिल्प गुरु, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत गोविन्द झारा के निधन के बाद उनके सम्मान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता ने कहा कि इतने उच्च राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित कलाकार को अंतिम यात्रा में राजकीय सम्मान न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्व. गोविन्द झारा को वर्ष 1986 एवं 1987 में राष्ट्रीय पुरस्कार, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ का सर्वोच्च सम्मान तथा वर्ष 2010 में भारत सरकार द्वारा “शिल्प गुरु” सम्मान प्राप्त हुआ था। उन्होंने अपनी अद्भुत बेलमेटल कला से रायगढ़ जिले का नाम देश-विदेश में रोशन किया। उन्हें कला जगत में भीष्म पितामह की संज्ञा दी जाती थी। उनके सुपुत्र धनी झारा एवं बहू भी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हैं। परिवार को देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के हाथों सम्मान प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद अंतिम संस्कार में राजकीय सम्मान न मिलना कला जगत और सामाजिक संगठनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। श्याम गुप्ता ने कहा कि शासन-प्रशासन को ऐसे महान हस्तियों के सम्मान में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। साथ ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को सहयोग प्रदान कर उनके तेरहवीं कार्यक्रम को स्मरणीय बनाने की दिशा में पहल करनी चाहिए। प्रेस रिपोर्टर क्लब परिवार की ओर से अंतिम दर्शन के दौरान स्व. गोविन्द झारा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया गया और शासन से मांग की गई कि भविष्य में ऐसे महान कलाकारों के सम्मान में स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि उनकी अंतिम विदाई गरिमापूर्ण ढंग से हो सके।

Feb 21, 2026 - 14:34
Feb 21, 2026 - 14:36
 0  2
💬 WhatsApp पर शेयर करें
राष्ट्रीय शिल्प गुरु गोविन्द झारा को राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल
राष्ट्रीय शिल्प गुरु गोविन्द झारा को राजकीय सम्मान न मिलने पर उठे सवाल

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0