26.72 लाख की कथित गड़बड़ी, फिर भी इंजीनियर को दो-दो जोन की कमान!
नगर निगम में गजब का न्याय! नोटिस मिला, कार्रवाई का अता-पता नहीं और जिम्मेदारी बढ़ाकर नवाजा गया अधिकारी बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम में अधिकारियों की पदस्थापना और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला खेल परिसर में फ्लड लाइट स्थापना के दौरान 26 लाख 72 हजार 928 रुपये के भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में कारण बताओ नोटिस पाने वाले सहायक अभियंता भीमेंद्र गौतम को अब जोन-3 और जोन-5 जैसे दो महत्वपूर्ण जोन की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले ने निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवालिया निशान लगा दिया है। गड़बड़ी के आरोपों के बीच जिम्मेदारी बढ़ी, कार्रवाई कहां? मामले के अनुसार, जिला खेल परिसर में फ्लड लाइट लगाने के दौरान दरों में अनियमितता सामने आई थी। जांच एवं परीक्षण में पाया गया कि फ्लड लाइट की दरें इलेक्ट्रिकल शेड्यूल ऑफ रेट्स (एसओआर) में उपलब्ध होने के बावजूद सामग्री की खरीदी नॉन-एसओआर दर पर की गई। इसके तहत निगम कोष से 26 लाख 72 हजार 928 रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में सहायक अभियंता भीमेंद्र गौतम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। तत्कालीन कार्यपालन अभियंता प्रवीण शुक्ला को भी नोटिस मिला था, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मामले में अधिकारी से जवाब मांगा गया, उसकी जांच और कार्रवाई का अंतिम परिणाम क्या रहा? क्या संबंधित अधिकारी ने अपना जवाब प्रस्तुत किया? क्या अनियमितता की जिम्मेदारी तय हुई? यदि हुई, तो कार्रवाई क्या की गई? क्या जवाबदेही से ज्यादा अहम है पदस्थापना? नगर निगम के इस फैसले को लेकर सवाल उठना लाजिमी है कि वित्तीय अनियमितता के मामले में नोटिस पाने वाले अधिकारी को दो-दो जोन की कमान सौंपने के पीछे क्या आधार रहा? यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो उसका निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं है? और यदि जांच या कार्रवाई लंबित है, तो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस प्रकरण में लाखों रुपये के भुगतान पर सवाल उठे, उसी से जुड़े अधिकारी को बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी मिल गई। इससे आम जनता के बीच यह संदेश जाने का खतरा है कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामलों में जवाबदेही तय करने के बजाय अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं। नगर निगम प्रशासन से उठते सीधे सवाल **26.72 लाख रुपये के भुगतान में सामने आई कथित अनियमितता की जांच कहां तक पहुंची? **कारण बताओ नोटिस पर संबंधित अधिकारी का जवाब क्या था? **क्या वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी तय की गई? **जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट किए बिना दो जोन की जिम्मेदारी सौंपने का आधार क्या है? **क्या निगम प्रशासन इस मामले में जांच की स्थिति और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करेगा? अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं। क्या प्रशासन इन सवालों का जवाब देकर स्थिति स्पष्ट करेगा, या फिर लाखों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण पर सवाल उठते रहेंगे और जिम्मेदारियों का बंटवारा भी इसी तरह होता रहेगा? जनता के पैसों का हिसाब और अधिकारियों की जवाबदेही—दोनों जरूरी हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने आना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदारी तय हुई या नहीं और संबंधित अधिकारी को दो जोन की कमान सौंपने का निर्णय किन तथ्यों के आधार पर लिया गया।
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