ऑनलाइन सिस्टम बंद, ऑफलाइन खेल चालू ! तखतपुर- तहसील में नियमों की खुलेआम धज्जियां, डायवर्सन के नाम पर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल
बिलासपुर। प्रदेश में सुशासन और भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” का दावा करने वाली साय सरकार के बीच बिलासपुर जिले के तखतपुर-सकरी तहसील क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन द्वारा अधिकांश तहसीलों में भूमि डायवर्सन एवं पुनः निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन किए जाने के बावजूद तखतपुर-सकरी क्षेत्र में अब भी ऑफलाइन आदेश जारी किए जा रहे हैं। इससे भ्रष्टाचार और मनमानी की आशंका गहरा गई है। ताजा मामला ग्राम बोड़सरा प.ह.नं. 37 स्थित खसरा नंबर 455/4 की 2720 वर्गफीट भूमि के पुनः निर्धारण आदेश से जुड़ा है, जिसमें अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय द्वारा ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से आवासीय प्रयोजन हेतु अनुमति जारी की गई है। आदेश में प्रीमियम, विकास उपकर, पर्यावरण उपकर और पंचायत उपकर तक निर्धारित किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ऑनलाइन प्रक्रिया लागू की है, तब आखिर किसके संरक्षण में ऑफलाइन फाइलों का खेल चल रहा है? राजस्व विभाग के जानकारों का कहना है कि ऑफलाइन प्रक्रिया में दस्तावेजों की हेराफेरी, नियमों की अनदेखी और “सेटिंग सिस्टम” की संभावना अधिक रहती है। यही वजह है कि शासन लगातार ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। सूत्रों की मानें तो तखतपुर-सकरी क्षेत्र में डायवर्सन और पुनः निर्धारण के कई मामलों में नियमों को ताक पर रखकर कार्य किए जाने की चर्चा लंबे समय से चल रही है।वही ऑफलाइन करने का एक और भी कारण है कि यहां आवेदकों से सामान्य से डबल लिया जा रहा है वही बड़ा रकबा का अधिक किया जा रहा है अब सवाल उठ रहा है कि जब जिले की अन्य तहसीलें ऑनलाइन प्रक्रिया से काम कर रही हैं तो आखिर इस तहसील में अलग व्यवस्था क्यों लागू है? क्या यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का माध्यम बन चुका है? आदेश में यह भी उल्लेख है कि भूमि को टुकड़ों में विभाजित कर विक्रय नहीं किया जाएगा, लेकिन पूर्व में ऐसे कई मामलों में नियमों के उल्लंघन के आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं होना कई संदेह पैदा करता है। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने कलेक्टर बिलासपुर से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि ऑफलाइन प्रक्रिया किस आदेश के तहत संचालित की जा रही है। साथ ही ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए जो शासन की ऑनलाइन व्यवस्था को दरकिनार कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। साय सरकार यदि वास्तव में “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है तो तखतपुर-सकरी तहसील का यह मामला उसकी परीक्षा बन सकता है। अब देखना होगा कि शासन और जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या कदम उठाते हैं, या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा
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