गंगा दशहरा महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सागर, सेवा-सत्संग से गूंजा भूलकहा आश्रम
बिलासपुर/बिल्हा। मनियारी नदी की गोद में बसे धौराभाठा स्थित भूलकहा आश्रम में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर 24 एवं 25 मई 2026 को दो दिवसीय भव्य गंगा दशहरा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। परम आराध्य श्री सदगुरु देव भगवान श्री श्री 1008 श्री स्वामी सदानंद जी महाराज परमहंस जी की पावन चरण रज से पवित्र हुई यह तपोभूमि आज आध्यात्मिक चेतना, संस्कार एवं जनकल्याण का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। परम श्रद्धेय श्री श्री 108 श्री स्वामी शिवानंद जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस दिव्य महोत्सव में श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और साधना का अद्भुत संगम देखा। गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर श्री सदगुरुदेव भगवान जी का पंचामृत स्नान एवं विशेष अभिषेक संपन्न कराया गया। पूरे आश्रम परिसर में हरिनाम संकीर्तन, भजन, सत्संग एवं गुरु महिमा की दिव्य ध्वनि गूंजती रही। दो दिवसीय आयोजन में दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भजन संध्या, नाम-सिमरन, सत्संग तथा श्रमदान के माध्यम से अपनी सहभागिता निभाई। आश्रम परिसर की स्वच्छता, रंग-रोगन एवं सौंदर्यीकरण कार्य में भक्तों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। विशेष रूप से मातृ शक्ति ने साफ-सफाई एवं भंडारा सेवा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। सत्संग के दौरान स्वामी शिवानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा— "सत्संग आत्मा को जागृत करता है, सेवा जीवन को पवित्र बनाती है और गुरु कृपा मनुष्य को प्रभु मार्ग की ओर अग्रसर करती है।" संतजनों ने गंगा दशहरा पर्व की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह पर्व केवल माँ गंगा के अवतरण का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और अंतर्मन की पवित्रता का भी संदेश देता है। गुरु कृपा और नाम-सिमरन से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और मनुष्य दिव्य चेतना की ओर अग्रसर होता है। श्रद्धालुओं ने भूलकहा आश्रम को केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, साधना और मानव कल्याण की जीवंत तपोभूमि बताया। आश्रम में समय-समय पर स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता, नशामुक्ति, आध्यात्मिक चेतना और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आयोजन में लोरमी, पंडरिया, मुंगेली, पथरिया, बिलासपुर, गौरेला, पेंड्रा, कोरबा, पाली, कुरुवार, बरपाली सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आश्रम समिति द्वारा भोजन प्रसादी एवं रात्रि विश्राम की भी समुचित व्यवस्था की गई। गुरु चरणों की पावन छाया में सम्पन्न यह गंगा दशहरा महोत्सव भक्तों के लिए भक्ति, सेवा, संस्कार और आत्मिक जागरण का अविस्मरणीय आध्यात्मिक पर्व बन गया।
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