बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाला: 14 एफआईआर दर्ज, फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाखों रुपये के मुआवजे का आरोप
बिलासपुर। सर्पदंश से मृत्यु पर मिलने वाले सरकारी मुआवजे में कथित फर्जीवाड़े ने बिलासपुर जिले में प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। विधानसभा में मामला उठने के बाद जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके आधार पर पुलिस ने 14 मामलों में एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि कुछ मामलों में बीमारी, विषाक्त पदार्थ के सेवन अथवा अन्य कारणों से हुई मौतों को सर्पदंश से हुई मृत्यु दर्शाकर शासन से आर्थिक सहायता प्राप्त की गई। जांच के दौरान कुल 17 संदिग्ध प्रकरणों की पड़ताल की गई। इनमें सार्वजनिक रूप से जिन मृतकों के नाम सामने आए हैं, उनमें शिवकुमारी यादव (तालापारा), सुनीता बाई सोनवानी (तखतपुर), संतोष कुमार (महमंद), कुंती बाई प्रजापति (तालापारा), केशव कुमार कश्यप, सफीना बानो (महमंद), भगत सिंह ठाकुर (कोनी), बहोरन लाल जायसवाल (खमतराई), शंकर साहू (सरकंडा), अशोक कुमार (खमतराई), शशि पाठक (सरकंडा), राजू कुमार (सरकंडा), निर्मला धृतलहरे, मनसुख लाल साहू, रामनारायण कैवर्त (कोनी), लक्ष्मीन कुर्रे (बोदरी) तथा उर्वशी श्रीवास (तखतपुर) शामिल हैं। इन मामलों में दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित अनियमितताओं के आधार पर कार्रवाई की गई है। पुलिस ने इस मामले में सरकंडा, कोनी, सिविल लाइन, तोरवा और सिटी कोतवाली थाना क्षेत्रों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ मामलों में मेडिकल दस्तावेज, पंचनामा, आवेदन और अन्य अभिलेखों में कथित हेरफेर कर मुआवजा स्वीकृत कराया गया। जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्टों में तहसील कार्यालय से जुड़े अधिकारी/कर्मचारी मुकेश देवांगन, शेषनारायण जायसवाल, अतुल वैष्णव, गरिमा ठाकुर तथा प्रकृति ध्रुव के नाम भी विभिन्न प्रकरणों के संदर्भ में उल्लेखित किए गए हैं। इनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस और प्रशासन की ओर से इन मामलों में विवेचना जारी है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। प्रारंभिक जांच में 60 लाख रुपये से अधिक के कथित फर्जी मुआवजे का खुलासा होने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि पुराने प्रकरणों की भी जांच की जा रही है और नए तथ्य सामने आने पर आगे और एफआईआर या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। वही इस मामले में तहसील कार्यालय के लगभग आधा दर्जन कर्मचारियों जिनमे बाबू,ड्राइवर, एव कुछ वकीलों से पूछताछ किया जा चुका है । यह मामला अब केवल फर्जी मुआवजा लेने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सरकारी अभिलेखों, चिकित्सीय दस्तावेजों और राजस्व प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच का विषय बन चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से जारी रहेगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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