वन भूमि पर JCB चलाने का किसका आदेश? पोड़ी उपरोड़ा में शून्य घोषित ज़मीन पर फिर मिट्टी खनन, SDM आदेश–वन विभाग की भूमिका पर सवाल

कोरबा - पोड़ी -उपरोड़ा स्थित चीर बंगले के सामने खसरा नंबर 356/22, रकबा 2.0250 हेक्टेयर की भूमि एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक विवाद और अवैध गतिविधियों का केंद्र बन गई है। जिस भूमि को पूर्व में राखड़ (फ्लाई ऐश) डालकर समतलीकरण किए जाने के बाद न्यायालय द्वारा विवादित (शून्य) घोषित किया गया था, उसी जमीन पर अब दोबारा JCB और ट्रैक्टर से मिट्टी पाटिंग व खनन का कार्य शुरू कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व शिव कुमार गोभील, पिता भागवत प्रसाद गोभील, निवासी बालगी प्रोजेक्ट, दर्री (कोरबा) द्वारा उक्त भूमि को अपनी बताते हुए राखड़ पाटिंग कराई जा रही थी। ग्रामीणों और पंचायत द्वारा जमीन के स्वामित्व पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद मामला माननीय SDM न्यायालय पहुंचा, जहां वैध दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने के चलते उक्त भूमि को विवादित/शून्य घोषित कर दिया गया था।इसके बावजूद हाल ही में उसी भूमि पर फिर से मिट्टी पाटिंग का कार्य शुरू कर दिया गया, बताया जा रहा है कि इस बार यह कार्य SDM स्तर से जारी आदेश के आधार पर कराया जा रहा था। लेकिन मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि ठेकेदार अहमद खान द्वारा वन विभाग की जमीन से ही मिट्टी निकाली जा रही है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्य को रोकते हुए भूमि को वन भूमि बताया। इस संबंध में डिप्टी रेंजर सनत कुमार संडिल्य ने हमारे संवाददाता से चर्चा में स्वीकार किया कि मिट्टी खुदाई और डंपिंग की जा रही भूमि वन विभाग के अंतर्गत आती है। हालांकि जब उनसे वैध दस्तावेजों की मांग की गई, तो यह कहकर टाल दिया गया कि कागजात उच्च अधिकारियों के पास हैं। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि ठेकेदार अहमद खान द्वारा न केवल वन भूमि बल्कि वन अधिकार पट्टा धारकों की जमीन पर भी खुलेआम मिट्टी खनन कराया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले अवैध खनन करते हुए JCB और ट्रैक्टर पकड़े भी गए, लेकिन कड़ी कार्रवाई करने के बजाय केवल काम बंद कराकर मामला दबा दिया गया। डिप्टी रेंजर और ठेकेदार द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि महिला की सहमति से वन अधिकार पट्टा की जमीन पर खुदाई कर पाटिंग की जा रही है, जबकि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि वन अधिकार पट्टा की भूमि पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक खनन कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले राखड़ पाटिंग से किसानों की फसल और स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, और अब वन भूमि से मिट्टी खनन किए जाने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है। क्षेत्र में भारी आक्रोश है और ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या प्रशासन इस खुले अवैध खेल पर लगाम लगाएगा, या फिर जिम्मेदारों को संरक्षण मिलता रहेगा?

Jan 23, 2026 - 13:38
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