मरवाही के जंगलों में 3 हाथियों का उत्पाद, ग्रामीणों में दहशत
मरवाही वन क्षेत्र में तीन हाथियों का आतंक, फसलों और मकानों को भारी नुकसान; रातभर रतजगा करने को मजबूर ग्रामीण मरवाही/भर्रीडांड | मरवाही वन मंडल क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से तीन हाथियों के एक दल ने भारी उत्पात मचा रखा है। ये हाथी लगातार ग्रामीणों के मकानों को तोड़ रहे हैं और धान की खड़ी फसलों को रौंदकर तबाह कर रहे हैं। दिनभर जंगलों में रहने के बाद हाथी शाम ढलते ही रिहाइशी इलाकों का रुख कर लेते हैं, जिससे ग्रामीणों में गहरा खौफ है और उन्हें पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ रही है। मध्य प्रदेश से आया हाथियों का दल वन विभाग के अनुसार, एक सप्ताह पूर्व मध्य प्रदेश से आए तीन हाथियों का यह दल मालाडांड, शिवनी और घुसरिया होते हुए मरवाही वन मंडल के कक्ष क्रमांक PF 2026 में विचरण कर रहा है। बीती रात हाथियों ने मरवाही नवाटोला में 5 मकानों को क्षति पहुंचाई और कुम्हारी में 6 किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया। इसके अलावा नन्दलाल तालाब के पास स्थित जमुना जायसवाल के फार्म हाउस की दीवार तोड़कर खेत में लगी धान की फसल को रौंद दिया। छतों पर चढ़कर ग्रामीणों ने बचाई जान शुक्रवार की रात दो हाथियों के उत्पात से वार्ड नंबर 11 और 12 में दहशत का माहौल बना रहा। कच्चे मकानों में रह रहे लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर पक्के मकानों की छतों पर चढ़ गए और पूरी रात खौफ के साए में काटी। बरसात के इस मौसम में आशियाना उजड़ने और सामान का नुकसान होने से ग्रामीण बेहद चिंतित हैं। स्थानीय निवासी प्रकाश चन्द राय, प्रताप रजक, सुनील कुमार सिरवास, प्रमोद कुमार राय और गोकुल केवट का कहना है कि मरवाही वन क्षेत्र कभी 'जामवंत गढ़' के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब भालुओं की सुरक्षा योजनाएं फाइलों में दब गई हैं और पिछले कुछ वर्षों से हाथियों का डेरा जमा हुआ है। वन विभाग के पास हाथियों को रोकने की कोई ठोस रणनीति नजर नहीं आ रही है। मुआवजे की प्रक्रिया राधा मुरारीलाल वन समिति के सभापति ने बताया कि नुकसान का आकलन करवाकर पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलवाया जाएगा। "हाथियों द्वारा पहुंचाए गए नुकसान का आंकलन वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। नियमानुसार तत्काल नकद सहायता देने का प्रावधान नहीं होता, आंकलन प्रकरण तैयार कर जिला कार्यालय भेजा जाता है, जहां से राशि स्वीकृत होने पर सीधे पीड़ितों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।" — मुकेश साह, रेंजर (मरवाही वन परिक्षेत्र)
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