ओमांश किसान सेवा केंद्र मंगला पर बड़ा सवाल: कैमरे चालू थे या बंद, जब कार की डिक्की में भर रहा था पेट्रोल-डीजल
"जब देश ईंधन बचाने की मुहिम चला रहा, तब कुछ पेट्रोल पंप मुनाफाखोरी में व्यस्त" बिलासपुर। एक ओर देश के प्रधानमंत्री लगातार ऊर्जा संरक्षण, पेट्रोल-डीजल की बचत तथा संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर में कुछ पेट्रोल पंपों पर इस संदेश को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। आरोप है कि मंगला बस्ती चौक स्थित इंडियन ऑयल के ओमांश किसान सेवा केंद्र में निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए चोरी-छिपे गैलनों में डीजल-पेट्रोल की बिक्री की जा रही है। जानकारी के अनुसार दोपहर के समय, जब पेट्रोल पंप पर अपेक्षाकृत सन्नाटा रहता है, तब कथित रूप से बिचौलियों को अधिक कीमत लेकर गैलनों एवं अन्य कंटेनरों में ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंगलवार दोपहर लगभग 2 बजे एक कार की डिक्की में रखे कंटेनरों में डीजल-पेट्रोल भरा जा रहा था। यह कार्य पेट्रोल पंप कर्मचारियों द्वारा बेहद गोपनीय तरीके से किया जा रहा था ताकि किसी की नजर न पड़े। ***सीसीटीवी कैमरे भी सवालों के घेरे में *** पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा एवं निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाना अनिवार्य माना जाता है। ऐसे में इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित रूप से जिस समय गैलनों में डीजल-पेट्रोल भरा जा रहा था, उस समय संबंधित सीसीटीवी कैमरे चालू थे या नहीं? यदि कैमरे चालू थे तो फुटेज से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है और यह स्पष्ट हो जाएगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। वहीं यदि कैमरे बंद पाए जाते हैं या फुटेज उपलब्ध नहीं होती है तो यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करेगा। आखिर जिस स्थान पर करोड़ों रुपये के ज्वलनशील पदार्थों का कारोबार होता है, वहां निगरानी व्यवस्था निष्क्रिय क्यों थी? प्रशासन और तेल कंपनी के अधिकारियों को तत्काल संबंधित दिन एवं समय की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांच करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका न रहे। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कैमरों की मौजूदगी के बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? **सवालों के घेरे में प्रशासन और जिम्मेदार विभाग** सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शासन द्वारा पेट्रोल पंपों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं तो फिर ऐसे मामलों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या स्थानीय प्रशासन, खाद्य विभाग, जिला आपूर्ति विभाग और तेल कंपनियों के अधिकारी इन गतिविधियों से अनजान हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी मात्रा में गैलनों में ईंधन बेचना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि इससे कालाबाजारी, अवैध भंडारण और सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरे भी उत्पन्न होते हैं। ज्वलनशील पदार्थों का इस प्रकार परिवहन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। क्या लाइसेंस निरस्तीकरण की होगी कार्रवाई? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पेट्रोल पंप के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस निरस्त किया जाना चाहिए। केवल औपचारिक जांच और नोटिस जारी करने से ऐसे मामलों पर अंकुश लगना मुश्किल है। एक सख्त कार्रवाई पूरे जिले के अन्य पेट्रोल पंप संचालकों के लिए नजीर बन सकती है। ***पेट्रोल पंप एसोसिएशन भी दे जवाब*** अब निगाहें जिला प्रशासन, संबंधित विभागों, इंडियन ऑयल के अधिकारियों तथा पेट्रोल पंप एसोसिएशन पर टिकी हैं। क्या वे इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराएंगे या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाएगा? जनता पूछ रही है... "क्या प्रधानमंत्री के ईंधन बचाओ संदेश से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ लोगों का मुनाफा है?" "क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं और बिचौलियों के लिए नहीं?" "क्या बिलासपुर में पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी पर प्रशासन अंकुश लगा पाएगा?" अब देखना यह है कि शिकायतों और आरोपों के बाद जिम्मेदार विभाग क्या रुख अपनाते हैं और क्या वास्तव में दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होती है जो भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगा सके।
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