गोलियों की गूंज छोड़ मुख्यधारा में लौटी महिला नक्सली, मंच पर किया आत्मसमर्पण
गोलियों की बौछार के बीच से निकलकर मंच तक पहुंचीं आत्मसमर्पित नक्सली, रैंप वॉक में दिखाया जलवा हरिभूमि न्यूज | रायपुर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में प्रदेशभर के बुनकरों का एक भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में एक तरफ जहां हस्तशिल्प और माटी कला बोर्ड से जुड़े कारीगरों की हौसला अफजाई की गई, वहीं मंच की सबसे खास बात बस्तर की आत्मसमर्पित युवतियों की मौजूदगी रही। बंदूक और बारूद की दुनिया छोड़कर मुख्यधारा में लौटीं इन युवतियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक कर हर किसी को हैरान कर दिया। बारूद की दुर्गंध से निकलकर रैंप तक का सफर ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में बस्तर से सैकड़ों प्रतिनिधि और कलाकार शामिल हुए। इस दौरान सुबह 11 से शाम 5 बजे तक उत्सव जैसा माहौल रहा। टीम के साथ आईं आत्मसमर्पित महिलाओं और बेटियों ने अब रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और बस्तर की समृद्ध कला-संस्कृति को नई पहचान दिलाने के प्रयास में जुटी हैं। आधुनिक पहनावे का पहला अहसास आत्मसमर्पित महिला फुलेलदेवे ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, "बस्तर में फैले बारूद की दुर्गंध से दूर हमें एक नई दुनिया मिली है। इतने बड़े मंच और भीड़ के बीच रैंप वॉक करना मार्च 2026 से पहले हमारे लिए एक सपने जैसा था। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद भी हमें अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला है।" सीएम ने की 'सेलफी विद स्वदेशी' से जुड़ने की अपील कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हथकरघा ब्रांड 'कोसा फेब' का शुभारंभ करते हुए कैटलॉग का विमोचन किया। इसके साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी लोकार्पण किया गया। हथकरघा दिवस का इतिहास: सीएम साय ने याद दिलाया कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 से इस दिवस को 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की थी। लोकल टू ग्लोबल: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य के हथकरघा उत्पादों को 'लोकल टू ग्लोबल' स्तर तक पहुंचाना है।
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