छत्तीसगढ़ चेंबर में संविधान संशोधन को लेकर घमासान, कमल सोनी ने दिया इस्तीफा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज में संवैधानिक संशोधन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। इसी बीच चेंबर के बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य कमल सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना दो पृष्ठों का त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष सतीश थोरानी को भेजा है। कमल सोनी ने त्यागपत्र में कहा है कि चेंबर में शामिल होने का उनका उद्देश्य संविधान में मौजूद त्रुटियों, विशेष रूप से धारा 9(1) और धारा 15 में आवश्यक संशोधन कराना था। उनका कहना है कि संशोधन का उद्देश्य पूरे छत्तीसगढ़ में संतुलित नेतृत्व, समान प्रतिनिधित्व और शासन के समक्ष व्यापारियों की प्रभावी एवं संतुलित आवाज सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कई बार पत्राचार किया, निवेदन किए और व्यक्तिगत रूप से भी नेतृत्व का ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन अपेक्षित पहल नहीं हुई। सोनी के अनुसार, 6 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर 9 अगस्त को बिलासपुर में प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में संविधान संशोधन का विषय शामिल करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन बाद में इस मुद्दे को एजेंडे से हटा दिया गया। कमल सोनी ने कहा कि घटनाक्रम से उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि पूरे प्रदेश में संतुलित नेतृत्व और समान प्रतिनिधित्व की व्यवस्था स्थापित करने को लेकर चेंबर नेतृत्व गंभीर नहीं है। उन्होंने वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में प्रतिनिधित्व के असंतुलन के कारण प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की आवाज प्रभावी रूप से सामने नहीं आने का भी आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पद से इस्तीफा देने के बावजूद व्यापारियों के हित में उनका संघर्ष जारी रहेगा। जब तक संविधान संशोधन की प्रक्रिया शुरू नहीं होती या कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे संतुलित प्रतिनिधित्व और समान नेतृत्व की मांग को लेकर प्रयास करते रहेंगे। इस्तीफे के बाद चेंबर के भीतर संविधान संशोधन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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